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mahabharat 6.117.16-17: उसके बाणों से व्याकुल होकर बहुत-से दंतधारी हाथी भी सब दिशाओं में भागने लगे। जैसे अग्नि को ईंधन मिल जाता है और वह बड़े वेग से प्रज्वलित होकर प्रज्वलित होने लगती है, उसी प्रकार आपका पुत्र दु:शासन अपने तेज से पाण्डव सेना को जलाता हुआ जल रहा था।   |   mahabharat अध्याय 6.117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  6.117.16-17 
शरातुरास्तथैवान्ये दन्तिनो विद्रुता दिश:॥ १६॥
यथाग्निरिन्धनं प्राप्य ज्वलेद् दीप्तार्चिरुल्बणम्।
तथा जज्वाल पुत्रस्ते पाण्डुसेनां विनिर्दहन्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उसके बाणों से व्याकुल होकर बहुत-से दंतधारी हाथी भी सब दिशाओं में भागने लगे। जैसे अग्नि को ईंधन मिल जाता है और वह बड़े वेग से प्रज्वलित होकर प्रज्वलित होने लगती है, उसी प्रकार आपका पुत्र दु:शासन अपने तेज से पाण्डव सेना को जलाता हुआ जल रहा था।
 
Agitated by his arrows, many tusked elephants also started running in all directions. Just as a fire gets fuel and starts blazing with blazing flames with great speed, in the same way your son Dushasan was burning with his brilliance while burning the Pandava army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)