श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  6.117.15-16h 
दु:शासनेन समरे रथिनो विरथीकृता:।
सादिनश्च महेष्वासा हस्तिनश्च महाबला:॥ १५॥
विनिर्भिन्ना: शरैस्तीक्ष्णैर्निपेतुर्वसुधातले।
 
 
अनुवाद
दु:शासन ने युद्धभूमि में अनेक महारथियों को रथहीन कर दिया। उसके तीखे बाणों से घायल होकर अनेक महाधनुर्धर और महापराक्रमी हाथी सवार भूमि पर गिर पड़े।
 
Dushasan rendered many charioteers chariotless on the battlefield. Many great archers and mighty elephant riders fell to the ground after being pierced by his sharp arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)