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mahabharat 6.117.13: हे राजन! युद्ध में आपके धनुर्धर एवं महामनस्वी पुत्र दु:शासन के पराक्रम से सभी लोग बहुत प्रसन्न हुए॥13॥   |   mahabharat अध्याय 6.117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.117.13 
कर्मणा तेन समरे तव पुत्रस्य धन्विन:।
दु:शासनस्य तुतुषु: सर्वे लोका महात्मन:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! युद्ध में आपके धनुर्धर एवं महामनस्वी पुत्र दु:शासन के पराक्रम से सभी लोग बहुत प्रसन्न हुए॥13॥
 
O King! Everyone was very pleased with the valour of your archer and great-minded son Dushasan in the war. ॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)