श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.117.11 
स समन्तात् परिवृतो भारतो भरतर्षभ।
निर्ददाह रणे शूरान् वने वह्निरिव ज्वलन्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
भारतभूषण! उस रणभूमि में चारों ओर से घिरे हुए भीष्मजी वन में प्रज्वलित होने वाली दावानल के समान योद्धाओं को जलाने लगे॥11॥
 
Bharatbhushan! Surrounded on all sides in that battlefield, Bhishma started burning the warriors like a wildfire blazing in the forest. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)