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mahabharat 6.116.79-80: उस समय पाण्डवपुत्र अर्जुन, जिनके सारथी श्रीकृष्ण थे और जिनके रथ को श्वेत घोड़े खींचते थे, तथा पांचालराज के पुत्र, महातेजस्वी शिखण्डी के अतिरिक्त और कोई ऐसा महारथी नहीं था, जो युद्धभूमि में भीष्म का सामना करने का साहस कर सके।   |   mahabharat अध्याय 6.116: कौरव-पाण्डव महारथियोंके द्वन्द्वयुद्धका वर्णन तथा भीष्मका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 116: कौरव-पाण्डव महारथियोंके द्वन्द्वयुद्धका वर्णन तथा भीष्मका पराक्रम  »  श्लोक 79-80
 
 
श्लोक  6.116.79-80 
न कश्चिदेनं समरे प्रत्युद्याति महारथ:॥ ७९॥
ऋते पाण्डुसुतं वीरं श्वेताश्वं कृष्णसारथिम्।
शिखण्डिनं च समरे पाञ्चाल्यममितौजसम्॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
उस समय पाण्डवपुत्र अर्जुन, जिनके सारथी श्रीकृष्ण थे और जिनके रथ को श्वेत घोड़े खींचते थे, तथा पांचालराज के पुत्र, महातेजस्वी शिखण्डी के अतिरिक्त और कोई ऐसा महारथी नहीं था, जो युद्धभूमि में भीष्म का सामना करने का साहस कर सके।
 
At that time except Arjuna, the son of Pandava, whose charioteer was Shri Krishna and whose chariot was drawn by white horses, and Shikhandi, the son of the prince of Panchala, who was of immense brilliance, there was no other great warrior who could dare to face Bhishma in the battle-field.
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि संकुलयुद्धे षोडशाधिकशततमोऽध्याय:॥ ११६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें संकुलयुद्धविषयक एक सौ सोलहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ११६॥

 
 
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