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mahabharat 6.116.74: हे प्रजानाथ! हमने बहुत से ऐसे रथ देखे जो तेज घोड़ों से जुते हुए थे, जिनमें कोई मनुष्य नहीं था और वे रथ वायु के समान वेग से इधर-उधर खींचे जा रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 6.116: कौरव-पाण्डव महारथियोंके द्वन्द्वयुद्धका वर्णन तथा भीष्मका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.116.74 
निर्मनुष्यान् रथान् राजन् सुयुक्ताञ्जवनैर्हयै:।
वातायमानानद्राक्षं ह्रियमाणान् विशाम्पते॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! हमने बहुत से ऐसे रथ देखे जो तेज घोड़ों से जुते हुए थे, जिनमें कोई मनुष्य नहीं था और वे रथ वायु के समान वेग से इधर-उधर खींचे जा रहे थे।
 
O Prajanath! We saw many chariots drawn by fast horses, in which there were no humans and those chariots were being pulled here and there as fast as the wind. 74.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)