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श्लोक  6.116.73 
अमोघा न्यपतन् बाणा: पितुस्ते मनुजेश्वर।
नासज्जन्त शरीरेषु भीष्मचापच्युता: शरा:॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
हे मनुजराज! आपके चाचा द्वारा छोड़े गए बाण कभी व्यर्थ नहीं गए। भीष्म के धनुष से छूटे हुए बाण कभी भी मनुष्यों के शरीर में नहीं लगे।
 
O Lord of Manus! The arrows shot by your uncle never went in vain. The arrows shot from Bhishma's bow never got stuck in the bodies of humans.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)