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शिखण्डी तु समासाद्य भरतानां पितामहम्।
इषुभिस्तूर्णमव्यग्रो बहुभि: स समाचिनोत्॥ ६५॥
अनुवाद
उसी समय शिखण्डी ने शान्तचित्त होकर भरतवंशी पितामह भीष्म के समक्ष पहुँचकर उन्हें शीघ्रतापूर्वक अनेक बाणों से ढक दिया ॥ 65॥
At that very moment Shikhandi, reaching before Bhishma, the grandfather of the Bharata clan, with a calm mind, quickly covered him with numerous arrows. ॥ 65॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥