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mahabharat 6.116.43: महाराज! सेनापति विराट ने भी तीस तीखे बाणों से सिंधुराज जयद्रथ की छाती पर गहरा घाव कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.116: कौरव-पाण्डव महारथियोंके द्वन्द्वयुद्धका वर्णन तथा भीष्मका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 116: कौरव-पाण्डव महारथियोंके द्वन्द्वयुद्धका वर्णन तथा भीष्मका पराक्रम  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  6.116.43 
विराटश्च महाराज सैन्धवं वाहिनीपति:।
त्रिंशद्भिर्निशितैर्बाणैराजघान स्तनान्तरे॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
महाराज! सेनापति विराट ने भी तीस तीखे बाणों से सिंधुराज जयद्रथ की छाती पर गहरा घाव कर दिया।
 
Maharaj! Commander Virat also inflicted a deep wound on the chest of Sindhuraj Jayadratha with thirty sharp arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)