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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 116: कौरव-पाण्डव महारथियोंके द्वन्द्वयुद्धका वर्णन तथा भीष्मका पराक्रम  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  6.116.37 
भीमसेनो गजानीकं योधयन् बह्वशोभत।
यथा शक्रो वज्रपाणिर्दारयन् पर्वतोत्तमान्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
जैसे वज्रधारी इन्द्र विशाल पर्वतों को विदीर्ण कर देते हैं, उसी प्रकार भीमसेन हाथियों की सेना के साथ युद्ध करते हुए अत्यन्त शोभायमान हो रहे थे।
 
And just as Indra, the bearer of the thunderbolt, pierces huge mountains, similarly Bhimasena looked very handsome while fighting with the army of elephants. 37.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)