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mahabharat 6.116.29-30h: राजन! क्रोधित होकर चित्रसेन ने धनुष को मोड़कर तीस बाणों से युद्धस्थल में सुशर्मा को अत्यन्त घायल कर दिया। महाराज! उसने युद्ध में भीष्म का यश और सम्मान दोनों बढ़ा दिया। 29 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.116: कौरव-पाण्डव महारथियोंके द्वन्द्वयुद्धका वर्णन तथा भीष्मका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 116: कौरव-पाण्डव महारथियोंके द्वन्द्वयुद्धका वर्णन तथा भीष्मका पराक्रम  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  6.116.29-30h 
चित्रसेनश्च तं राजंस्त्रिंशता नतपर्वभि:।
आजघान रणे क्रुद्ध: स च तं प्रत्यविध्यत॥ २९॥
भीष्मस्य समरे राजन् यशो मानं च वर्धयन्।
 
 
अनुवाद
राजन! क्रोधित होकर चित्रसेन ने धनुष को मोड़कर तीस बाणों से युद्धस्थल में सुशर्मा को अत्यन्त घायल कर दिया। महाराज! उसने युद्ध में भीष्म का यश और सम्मान दोनों बढ़ा दिया। 29 1/2॥
 
Rajan! Enraged, Chitrasena deeply injured Susharma in the battlefield with thirty arrows with bent bows. Maharaj! He increased both the fame and respect of Bhishma in the battle. 29 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)