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mahabharat 6.116.16: महाराज! धृष्टकेतु ने दूसरा धनुष लिया और पौरव को तिहत्तर तीखे पत्थरनुमा बाणों से बुरी तरह घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.116: कौरव-पाण्डव महारथियोंके द्वन्द्वयुद्धका वर्णन तथा भीष्मका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 116: कौरव-पाण्डव महारथियोंके द्वन्द्वयुद्धका वर्णन तथा भीष्मका पराक्रम  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.116.16 
सोऽन्यत् कार्मुकमादाय पौरवं निशितै: शरै:।
आजघान महाराज त्रिसप्तत्या शिलीमुखै:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
महाराज! धृष्टकेतु ने दूसरा धनुष लिया और पौरव को तिहत्तर तीखे पत्थरनुमा बाणों से बुरी तरह घायल कर दिया।
 
Maharaj! Dhrishtaketu took another bow and wounded Paurava deeply with seventy-three sharp stone-headed arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)