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mahabharat 6.116.10: तब अनन्त आत्मबल से संपन्न सात्यकि ने भी गुरुपुत्र अश्वत्थामा के समस्त अंगों में कंकण जड़े हुए नौ बाण मारे॥10॥   |   mahabharat अध्याय 6.116: कौरव-पाण्डव महारथियोंके द्वन्द्वयुद्धका वर्णन तथा भीष्मका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 116: कौरव-पाण्डव महारथियोंके द्वन्द्वयुद्धका वर्णन तथा भीष्मका पराक्रम  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.116.10 
शैनेयोऽपि गुरो: पुत्रं सर्वमर्मसु भारत।
अताडयदमेयात्मा नवभि: कङ्कवाजितै:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तब अनन्त आत्मबल से संपन्न सात्यकि ने भी गुरुपुत्र अश्वत्थामा के समस्त अंगों में कंकण जड़े हुए नौ बाण मारे॥10॥
 
India Then Satyaki, endowed with infinite self-power, also shot nine arrows studded with pebbles in all the core parts of Guru's son Ashwatthama. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)