यथाप्रतिज्ञं कौरव्य: स चापि समितिंजय:।
पार्थानामकरोद् भीष्म: सततं समितिक्षयम्॥ ५॥
अनुवाद
इसी प्रकार युद्धों में विजयी कुरुवंशी पुत्र भीष्म अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार युद्ध में सदैव कुन्तीपुत्रों के सैनिकों का संहार करते थे ॥5॥
Similarly, Bhishma, the son of the Kuru clan, victorious in wars, always killed the soldiers of the sons of Kunti in war in accordance with his vow. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥