श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 115: भीष्मके आदेशसे युधिष्ठिरका उनपर आक्रमण तथा कौरव-पाण्डव-सैनिकोंका भीषण युद्ध  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  6.115.40 
प्रासशक्त्यृष्टिसङ्घैश्च बाणौघैश्च समाकुलम्।
निष्प्रकाशमिवाकाशं सेनयो: समपद्यत॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
वहाँ दोनों सेनाओंके बल, पराक्रम, अस्त्र-शस्त्र और बाणोंसे भरा हुआ आकाश प्रकाशरहित प्रतीत हो रहा था ॥40॥
 
The sky there, filled with the strength, power, weapons and arrows of both the armies, seemed to be devoid of light. ॥ 40॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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