श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 115: भीष्मके आदेशसे युधिष्ठिरका उनपर आक्रमण तथा कौरव-पाण्डव-सैनिकोंका भीषण युद्ध  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  6.115.21-22 
ते तथा समयं कृत्वा दशमेऽहनि पाण्डवा:।
ब्रह्मलोकपरा भूत्वा संजग्मु: क्रोधमूर्च्छिता:॥ २१॥
शिखण्डिनं पुरस्कृत्य पाण्डवं च धनंजयम्।
भीष्मस्य पातने यत्नं परमं ते समास्थिता:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तब वे पाण्डव सैनिक दसवें दिन ऐसा ही करने की प्रतिज्ञा करके तथा ब्रह्मलोक को लक्ष्य बनाकर क्रोध से मूर्छित होकर शिखण्डी और पाण्डुपुत्र अर्जुन को आगे करके आगे बढ़े और भीष्म को मार डालने के लिए महान् प्रयत्न करने लगे॥21-22॥
 
Then those Pandava soldiers, vowing to do the same on the tenth day and making Brahmaloka their target, fainted with anger, moved forward with Shikhandi and Pandu's son Arjun in front and started making great efforts to kill Bhishma. 21-22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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