श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 115: भीष्मके आदेशसे युधिष्ठिरका उनपर आक्रमण तथा कौरव-पाण्डव-सैनिकोंका भीषण युद्ध  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.115.20 
मा वो भीष्माद् भयं किञ्चिदस्त्वद्य युधि सृंजया:।
ध्रुवं भीष्मं विजेष्याम: पुरस्कृत्य शिखण्डिनम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
सृंजय वीरो! आज युद्ध में भीष्मजी से तुम तनिक भी मत डरना। हम शिखण्डी को आगे करके भीष्म पर अवश्य विजय प्राप्त करेंगे। 20॥
 
Srinjay Veero! Don't be at all afraid of Bhishmaji in the battle today. We will definitely win over Bhishma by putting Shikhandi forward. 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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