श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 115: भीष्मके आदेशसे युधिष्ठिरका उनपर आक्रमण तथा कौरव-पाण्डव-सैनिकोंका भीषण युद्ध  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  6.115.17-18 
धृष्टद्युम्नस्ततो राजन् पाण्डवश्च युधिष्ठिर:।
श्रुत्वा भीष्मस्य तां वाचं चोदयामासतुर्बलम्॥ १७॥
अभिद्रवध्वं युध्यध्वं भीष्मं जयत संयुगे।
रक्षिता: सत्यसंधेन जिष्णुना रिपुजिष्णुना॥ १८॥
 
 
अनुवाद
राजन! उस समय भीष्मजी के उन वचनों को सुनकर धृष्टद्युम्न और पाण्डुनंदन युधिष्ठिर ने अपनी सेना को आदेश दिया - 'वीरों! आगे बढ़ो। युद्ध करो और युद्ध में भीष्म को जीतो। शत्रुओं पर विजय पाने वाले और सत्य की शपथ लेने वाले अर्जुन द्वारा तुम सबकी रक्षा हो।' 17-18॥
 
Rajan! At that time, hearing those words of Bhishmaji, Dhrishtadyumna and Pandanu Nandan Yudhishthir ordered their army - 'Braves! go ahead. Fight and win over Bhishma in the battle. May all of you be protected by Arjuna, the one who conquers the enemy and has sworn in truth. 17-18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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