श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 115: भीष्मके आदेशसे युधिष्ठिरका उनपर आक्रमण तथा कौरव-पाण्डव-सैनिकोंका भीषण युद्ध  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  6.115.1-2 
धृतराष्ट्र उवाच
कथं शान्तनवो भीष्मो दशमेऽहनि संजय।
अयुध्यत महावीर्य: पाण्डवै: सहसृंजयै:॥ १॥
कुरवश्च कथं युद्धे पाण्डवान् प्रत्यवारयन्।
आचक्ष्व मे महायुद्धं भीष्मस्याहवशोभिन:॥ २॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा- संजय! महाबली शान्तनुपुत्र भीष्म ने दसवें दिन पाण्डवों और सृंजयों के साथ किस प्रकार युद्ध किया तथा कौरवों ने पाण्डवों को युद्ध में किस प्रकार रोका? रणभूमि में प्रतापी भीष्म के उस महासंग्राम का वृत्तान्त कहिए।
 
Dhritarashtra asked- Sanjay! How did the mighty Shantanu's son Bhishma fight with the Pandavas and Srinjayas on the tenth day and how did the Kauravas stop the Pandavas in the war? Tell me the story of that great battle of Bhishma who was glorious in the battlefield.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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