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mahabharat 6.113.52-53: दुर्योधन के ये वचन सुनकर प्रस्थल के स्वामी त्रिगर्तराज सुशर्मा युद्धभूमि में दौड़े और उन्होंने सहस्रों रथियों द्वारा दोनों धनुर्धर भीमसेन और अर्जुन को चारों ओर से घेर लिया। उस समय अर्जुन शत्रुओं के साथ घोर युद्ध कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 6.113: कौरवपक्षके दस प्रमुख महारथियोंके साथ अकेले घोर युद्ध करते हुए भीमसेनका अद्भुत पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 113: कौरवपक्षके दस प्रमुख महारथियोंके साथ अकेले घोर युद्ध करते हुए भीमसेनका अद्भुत पराक्रम  »  श्लोक 52-53
 
 
श्लोक  6.113.52-53 
तच्छ्रुत्वा वचनं तस्य त्रैगर्त: प्रस्थलाधिप:।
अभिद्रुत्य रणे भीममर्जुनं चैव धन्विनौ॥ ५२॥
रथैरनेकसाहस्रै: समन्तात् पर्यवारयत्।
तत: प्रववृते युद्धमर्जुनस्य परै: सह॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन के ये वचन सुनकर प्रस्थल के स्वामी त्रिगर्तराज सुशर्मा युद्धभूमि में दौड़े और उन्होंने सहस्रों रथियों द्वारा दोनों धनुर्धर भीमसेन और अर्जुन को चारों ओर से घेर लिया। उस समय अर्जुन शत्रुओं के साथ घोर युद्ध कर रहे थे।
 
On hearing these words of Duryodhan, the lord of Prasthala, Trigartaraj Susharma rushed into the battlefield and surrounded both the brave archers Bhimasena and Arjuna from all sides with thousands of chariots. At that time, Arjuna was engaged in a fierce battle with the enemies.
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि भीमपराक्रमे त्रयोदशाधिकशततमोऽध्याय:॥ ११३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें भीमसेनका पराक्रमविषयक एक सौ तेरहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ११३॥

[दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल ५४ श्लोक हैं।]
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)