Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.113.41: परन्तु वायुपुत्र भीमसेन ने एक ही छुरे से जयद्रथ की फेंकी हुई तलवार के दो टुकड़े कर दिये; फिर तीन बाणों से उसने उस तलवार के टुकड़े कर दिये, जैसे तिल के डंठल के टुकड़े हो जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 6.113: कौरवपक्षके दस प्रमुख महारथियोंके साथ अकेले घोर युद्ध करते हुए भीमसेनका अद्भुत पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 113: कौरवपक्षके दस प्रमुख महारथियोंके साथ अकेले घोर युद्ध करते हुए भीमसेनका अद्भुत पराक्रम  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  6.113.41 
तोमरं च द्विधा चक्रे क्षुरप्रेणानिलात्मज:।
पट्टिशं च त्रिभिर्बाणैश्चिच्छेद तिलकाण्डवत्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
परन्तु वायुपुत्र भीमसेन ने एक ही छुरे से जयद्रथ की फेंकी हुई तलवार के दो टुकड़े कर दिये; फिर तीन बाणों से उसने उस तलवार के टुकड़े कर दिये, जैसे तिल के डंठल के टुकड़े हो जाते हैं।
 
But Bhimasena, the son of Vayu, with a single razor, broke the sword thrown by Jayadratha into two pieces; then with three arrows he broke the sash into pieces like the stalk of a sesame seed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)