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mahabharat 6.113.34-35: तत्पश्चात् भीमसेन ने युद्धस्थल में राजा शल्य को नौ लोहे के बाणों से, भगदत्त को तीन बाणों से, कृतवर्मा को आठ बाणों से तथा कृपाचार्य आदि महारथियों को दो-दो बाणों से घायल कर दिया। हे राजन! तत्पश्चात् उन्होंने भी अपने तीखे बाणों से भीमसेन को घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.113: कौरवपक्षके दस प्रमुख महारथियोंके साथ अकेले घोर युद्ध करते हुए भीमसेनका अद्भुत पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 113: कौरवपक्षके दस प्रमुख महारथियोंके साथ अकेले घोर युद्ध करते हुए भीमसेनका अद्भुत पराक्रम  »  श्लोक 34-35
 
 
श्लोक  6.113.34-35 
भीमस्तु समरे विद्‍ध्वा शल्यं नवभिरायसै:।
भगदत्तं त्रिभिश्चैव कृतवर्माणमष्टभि:॥ ३४॥
द्वाभ्यां द्वाभ्यां तु विव्याध गौतमप्रभृतीन् रथान्।
तेऽपि तं समरे राजन् विव्यधुर्निशितै: शरै:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भीमसेन ने युद्धस्थल में राजा शल्य को नौ लोहे के बाणों से, भगदत्त को तीन बाणों से, कृतवर्मा को आठ बाणों से तथा कृपाचार्य आदि महारथियों को दो-दो बाणों से घायल कर दिया। हे राजन! तत्पश्चात् उन्होंने भी अपने तीखे बाणों से भीमसेन को घायल कर दिया।
 
Thereafter, Bhimasena pierced King Shalya with nine iron arrows in the battlefield, Bhagadatta with three arrows, Kritavarma with eight arrows and two arrows each to charioteers like Kripacharya. O King! Then they too wounded Bhimasena with their sharp arrows. 34-35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)