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mahabharat 6.113.30-31: राजन! तब पाण्डवों के महारथी भीमसेन ने क्रोध में भरकर मद्रराज शल्य को तीन बाणों से और कृपाचार्य को नौ बाणों से घायल कर दिया तथा प्राग्ज्योतिष्णराज भगदत्त को रणभूमि में सैकड़ों बाणों से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.113: कौरवपक्षके दस प्रमुख महारथियोंके साथ अकेले घोर युद्ध करते हुए भीमसेनका अद्भुत पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 113: कौरवपक्षके दस प्रमुख महारथियोंके साथ अकेले घोर युद्ध करते हुए भीमसेनका अद्भुत पराक्रम  »  श्लोक 30-31
 
 
श्लोक  6.113.30-31 
स तु क्रोधसमाविष्ट: पाण्डवानां महारथ:।
मद्रेश्वरं त्रिभिर्बाणैर्भृशं विद्‍ध्वा महायशा:॥ ३०॥
कृपं च नवभिर्बाणैर्भृशं विद्‍ध्वा समन्तत:।
प्राग्ज्योतिषं शतैराजौ राजन् विव्याध सायकै:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
राजन! तब पाण्डवों के महारथी भीमसेन ने क्रोध में भरकर मद्रराज शल्य को तीन बाणों से और कृपाचार्य को नौ बाणों से घायल कर दिया तथा प्राग्ज्योतिष्णराज भगदत्त को रणभूमि में सैकड़ों बाणों से घायल कर दिया।
 
Rajan! Then, filled with anger, Bhimasena, the great charioteer of the Pandavas, wounded Madra king Shalya with three arrows and Kripacharya with nine arrows and pierced Pragjyotishna king Bhagadatta in the battlefield with hundreds of arrows. 30-31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)