Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.113.29: उसके द्वारा अत्यन्त घायल होने पर भी महाधनुर्धर भीमसेन तनिक भी विचलित या व्याकुल नहीं हुए, जैसे बादलों द्वारा बरसाये गये जल के वेग से पर्वत विचलित हो जाता है। | mahabharat अध्याय 6.113: कौरवपक्षके दस प्रमुख महारथियोंके साथ अकेले घोर युद्ध करते हुए भीमसेनका अद्भुत पराक्रम । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सोऽतिविद्धो महेष्वासो भीमसेनो न विव्यथे।
पर्वतो वारिधाराभिर्वर्षमाणैरिवाम्बुदै:॥ २९॥
अनुवाद
उसके द्वारा अत्यन्त घायल होने पर भी महाधनुर्धर भीमसेन तनिक भी विचलित या व्याकुल नहीं हुए, जैसे बादलों द्वारा बरसाये गये जल के वेग से पर्वत विचलित हो जाता है।
Even after being severely wounded by him, the great archer Bhimasena was not at all distressed or disturbed, like a mountain affected by the torrents of water poured down by the clouds.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥