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mahabharat 6.113.20-21: उस समय राजा शल्य भीमसेन का पराक्रम सहन न कर सके, उन्होंने लोहार के द्वारा तीखे बनाए हुए तीखे बाणों द्वारा युद्धस्थल में भीमसेन को घायल कर दिया और कहा - 'खड़े रहो, खड़े रहो'॥ 20-21॥   |   mahabharat अध्याय 6.113: कौरवपक्षके दस प्रमुख महारथियोंके साथ अकेले घोर युद्ध करते हुए भीमसेनका अद्भुत पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 113: कौरवपक्षके दस प्रमुख महारथियोंके साथ अकेले घोर युद्ध करते हुए भीमसेनका अद्भुत पराक्रम  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  6.113.20-21 
तदा न ममृषे शल्यो भीमसेनस्य विक्रमम्॥ २०॥
स संधाय शरांस्तीक्ष्णान् कर्मारपरिमार्जितान्।
भीमं विव्याध समरे तिष्ठ तिष्ठेति चाब्रवीत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उस समय राजा शल्य भीमसेन का पराक्रम सहन न कर सके, उन्होंने लोहार के द्वारा तीखे बनाए हुए तीखे बाणों द्वारा युद्धस्थल में भीमसेन को घायल कर दिया और कहा - 'खड़े रहो, खड़े रहो'॥ 20-21॥
 
At that time King Shalya could not tolerate the might of Bhimasena. He shot sharp arrows sharpened by the blacksmith and pierced Bhimasena on the battlefield and said – ‘Stand, stand’॥ 20-21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)