स विद्धो दशभिर्बाणैस्तोत्रैरिव महाद्विप:॥ १३॥
(व्यनदत् समरे शूर: सिंहवद् रणमूर्धनि।)
अनुवाद
जैसे अंकुश लगने पर विशाल हाथी गर्जना करता है, उसी प्रकार वीर भीमसेन उन दस बाणों से घायल होकर युद्धभूमि के मुहाने पर सिंह के समान गर्जना करने लगे।
Just as a great elephant roars when it is struck by the goads, so the valiant Bhimasena roared like a lion at the mouth of the battle-field when he was wounded by those ten arrows.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥