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mahabharat 6.113.11-12h: तत्पश्चात् भीमसेन ने दुर्मर्षण को बीस बाणों से, चित्रसेन को पाँच बाणों से, विकर्ण को दस बाणों से तथा जयद्रथ को पाँच बाणों से घायल करके हर्ष से गर्जना की और पुनः तीन बाणों से जयद्रथ को घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.113: कौरवपक्षके दस प्रमुख महारथियोंके साथ अकेले घोर युद्ध करते हुए भीमसेनका अद्भुत पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 113: कौरवपक्षके दस प्रमुख महारथियोंके साथ अकेले घोर युद्ध करते हुए भीमसेनका अद्भुत पराक्रम  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  6.113.11-12h 
दुर्मर्षणं च विंशत्या चित्रसेनं च पञ्चभि:।
विकर्णं दशभिर्बाणै: पञ्चभिश्च जयद्रथम्॥ ११॥
विद्‍ध्वा भीमोऽनदद्‍धृष्ट: सैन्धवं च पुनस्त्रिभि:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भीमसेन ने दुर्मर्षण को बीस बाणों से, चित्रसेन को पाँच बाणों से, विकर्ण को दस बाणों से तथा जयद्रथ को पाँच बाणों से घायल करके हर्ष से गर्जना की और पुनः तीन बाणों से जयद्रथ को घायल कर दिया।
 
Thereafter, Bhimasena, having pierced Durmarshan with twenty arrows, Chitrasena with five arrows, Vikarna with ten arrows and Jaydratha with five arrows, roared in joy and again pierced Jaydratha with three arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)