Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.112.5: मेरे बाण तरकस से निकल पड़े हैं, मेरा धनुष टंकारने लगा है, मेरे हथियार धनुष पर चढ़ गए हैं और मेरा मन क्रूर कर्म करने का विचार कर रहा है॥5॥ | mahabharat अध्याय 6.112: द्रोणाचार्यका अश्वत्थामाको अशुभ शकुनोंकी सूचना देते हुए उसे भीष्मकी रक्षाके लिये धृष्टद्युम्नसे युद्ध करनेका आदेश देना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उत्पतन्ति हि मे बाणा धनु: प्रस्फुरतीव च।
योगमस्त्राणि गच्छन्ति क्रूरे मे वर्तते मति:॥ ५॥
अनुवाद
मेरे बाण तरकस से निकल पड़े हैं, मेरा धनुष टंकारने लगा है, मेरे हथियार धनुष पर चढ़ गए हैं और मेरा मन क्रूर कर्म करने का विचार कर रहा है॥5॥
‘My arrows leap out from the quiver, my bow starts quivering, my weapons attach themselves to the bow and my mind is contemplating to commit cruel acts.॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥