श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 112: द्रोणाचार्यका अश्वत्थामाको अशुभ शकुनोंकी सूचना देते हुए उसे भीष्मकी रक्षाके लिये धृष्टद्युम्नसे युद्ध करनेका आदेश देना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  6.112.37 
सात्यकिश्चाभिमन्युश्च धृष्टद्युम्नवृकोदरौ।
पर्यरक्षन्त राजानं यमौ च मनुजेश्वरम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
सात्यकि, अभिमन्यु, धृष्टद्युम्न, भीमसेन और नकुल, सहदेव नरेश्वर राजा युधिष्ठिर की रक्षा कर रहे हैं। 37॥
 
Satyaki, Abhimanyu, Dhrishtadyumna, Bhimsen and Nakul, Sahadeva Nareshwar are protecting King Yudhishthir. 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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