श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 112: द्रोणाचार्यका अश्वत्थामाको अशुभ शकुनोंकी सूचना देते हुए उसे भीष्मकी रक्षाके लिये धृष्टद्युम्नसे युद्ध करनेका आदेश देना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  6.112.35 
हाहाकिलकिलाशब्दा: श्रूयन्ते च चमूमुखे।
याहि पाञ्चालदायादमहं यास्ये युधिष्ठिरम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
सेना के मुख्य भाग में कोलाहल और जयघोष की ध्वनियाँ सुनाई दे रही हैं। तुम द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न का सामना करने जाओ, मैं युधिष्ठिर पर आक्रमण करूँगा।
 
‘Sounds of uproar and shouting are heard in the main part of the army. You go to face Dhrishtadyumna, son of Drupada, and I will attack Yudhishthira.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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