Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.112.30-31: यहाँ केवल कुन्तीकुमार युधिष्ठिर में ही ब्राह्मणभक्ति, इन्द्रिय-संयम, दान, तप और सदाचार आदि सद्गुण दृष्टिगोचर होते हैं, जिसके फलस्वरूप उन्हें अर्जुन, बलवान भीम और माद्रीकुमार पाण्डुपुत्र नकुल और सहदेव जैसे भाई मिले हैं और वृष्णिनन्दन भगवान वसुदेव उनके रक्षक और सहायक बनकर सदैव उनके साथ रहते हैं ॥30-31॥ | mahabharat अध्याय 6.112: द्रोणाचार्यका अश्वत्थामाको अशुभ शकुनोंकी सूचना देते हुए उसे भीष्मकी रक्षाके लिये धृष्टद्युम्नसे युद्ध करनेका आदेश देना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यहाँ केवल कुन्तीकुमार युधिष्ठिर में ही ब्राह्मणभक्ति, इन्द्रिय-संयम, दान, तप और सदाचार आदि सद्गुण दृष्टिगोचर होते हैं, जिसके फलस्वरूप उन्हें अर्जुन, बलवान भीम और माद्रीकुमार पाण्डुपुत्र नकुल और सहदेव जैसे भाई मिले हैं और वृष्णिनन्दन भगवान वसुदेव उनके रक्षक और सहायक बनकर सदैव उनके साथ रहते हैं ॥30-31॥
Here only in Kuntikumar Yudhishthir, the virtues like devotion towards Brahmins, control of senses, charity, austerity and good conduct etc. are visible, as a result of which he has got brothers like Arjun, strong Bhima and Madrikumar Pandu's son Nakul and Sahadeva and Vrishninandan Lord Vasudev always remains with him as his protector and helper. 30-31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥