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mahabharat 6.112.29: यह युद्ध अत्यंत भयंकर एवं दुर्गम नदी के समान है। रथ, हाथी और घोड़े इसमें भँवर हैं। वानरों का ध्वजवाहक अर्जुन रथ रूपी नाव पर सवार होकर इसे पार कर रहा है।   |   mahabharat अध्याय 6.112: द्रोणाचार्यका अश्वत्थामाको अशुभ शकुनोंकी सूचना देते हुए उसे भीष्मकी रक्षाके लिये धृष्टद्युम्नसे युद्ध करनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 112: द्रोणाचार्यका अश्वत्थामाको अशुभ शकुनोंकी सूचना देते हुए उसे भीष्मकी रक्षाके लिये धृष्टद्युम्नसे युद्ध करनेका आदेश देना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  6.112.29 
रथनागहयावर्तां महाघोरां सुदुर्गमाम्।
रथेन संग्रामनदीं तरत्येष कपिध्वज:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
यह युद्ध अत्यंत भयंकर एवं दुर्गम नदी के समान है। रथ, हाथी और घोड़े इसमें भँवर हैं। वानरों का ध्वजवाहक अर्जुन रथ रूपी नाव पर सवार होकर इसे पार कर रहा है।
 
‘This war is like a very fierce and extremely impassable river. Chariots, elephants and horses are whirlpools in it. Arjuna, the flag-bearer of the monkeys, is crossing it in a boat in the form of a chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)