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mahabharat 6.112.25-26: देखो, आज इस घोर संग्राम में कैसा महान संहार हो रहा है । अर्जुन के मुड़े हुए बाणों से योद्धाओं के स्वर्णजटित, शुभ और महान कवच छिन्न-भिन्न हो रहे हैं । ध्वजाओं, गदाओं और धनुषों के अग्रभाग टुकड़े-टुकड़े हो रहे हैं ॥ 25-26॥   |   mahabharat अध्याय 6.112: द्रोणाचार्यका अश्वत्थामाको अशुभ शकुनोंकी सूचना देते हुए उसे भीष्मकी रक्षाके लिये धृष्टद्युम्नसे युद्ध करनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 112: द्रोणाचार्यका अश्वत्थामाको अशुभ शकुनोंकी सूचना देते हुए उसे भीष्मकी रक्षाके लिये धृष्टद्युम्नसे युद्ध करनेका आदेश देना  »  श्लोक 25-26
 
 
श्लोक  6.112.25-26 
पश्याद्यैतन्महाघोरे संयुगे वैशसं महत्।
हेमचित्राणि शूराणां महान्ति च शुभानि च॥ २५॥
कवचान्यवदीर्यन्ते शरै: संनतपर्वभि:।
छिद्यन्ते च ध्वजाग्राणि तोमराश्च धनूंषि च॥ २६॥
 
 
अनुवाद
देखो, आज इस घोर संग्राम में कैसा महान संहार हो रहा है । अर्जुन के मुड़े हुए बाणों से योद्धाओं के स्वर्णजटित, शुभ और महान कवच छिन्न-भिन्न हो रहे हैं । ध्वजाओं, गदाओं और धनुषों के अग्रभाग टुकड़े-टुकड़े हो रहे हैं ॥ 25-26॥
 
‘See what a great carnage is taking place today in this fierce battle. The golden-studded, auspicious and great armour of the warriors is being pierced by Arjuna's bent-knotted arrows. The fronts of the flags, the maces and the bows are being cut into pieces.॥ 25-26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)