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mahabharat 6.112.22: पाण्डुनन्दन अर्जुन बुद्धिमान, बलवान, शूरवीर, अस्त्रविद्या में निपुण, शीघ्रता से पराक्रम दिखाने वाले, दूर स्थित लक्ष्य पर प्रहार करने वाले, प्रबल बाणों के संग्रह वाले तथा शुभ-अशुभ कारणों को जानने वाले हैं ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 6.112: द्रोणाचार्यका अश्वत्थामाको अशुभ शकुनोंकी सूचना देते हुए उसे भीष्मकी रक्षाके लिये धृष्टद्युम्नसे युद्ध करनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 112: द्रोणाचार्यका अश्वत्थामाको अशुभ शकुनोंकी सूचना देते हुए उसे भीष्मकी रक्षाके लिये धृष्टद्युम्नसे युद्ध करनेका आदेश देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  6.112.22 
मनस्वी बलवाञ्छूर: कृतास्त्रो लघुविक्रम:।
दूरपाती दृढेषुश्च निमित्तज्ञश्च पाण्डव:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुनन्दन अर्जुन बुद्धिमान, बलवान, शूरवीर, अस्त्रविद्या में निपुण, शीघ्रता से पराक्रम दिखाने वाले, दूर स्थित लक्ष्य पर प्रहार करने वाले, प्रबल बाणों के संग्रह वाले तथा शुभ-अशुभ कारणों को जानने वाले हैं ॥22॥
 
Pandunandan Arjuna is wise, strong, brave, expert in the field of weapons, one who displays bravery quickly, one who can hit far-off targets, one who has a collection of strong arrows and is knowledgeable about auspicious and unlucky reasons. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)