श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 112: द्रोणाचार्यका अश्वत्थामाको अशुभ शकुनोंकी सूचना देते हुए उसे भीष्मकी रक्षाके लिये धृष्टद्युम्नसे युद्ध करनेका आदेश देना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.112.21 
युधिष्ठिरस्य च क्रोधो भीष्मश्चार्जुनसङ्गत:।
मम चास्त्रसमारम्भ: प्रजानामशिवं ध्रुवम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर का क्रोध, भीष्म और अर्जुन का युद्ध तथा मेरा नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों का प्रयोग करना - ये तीनों घटनाएँ निश्चय ही प्रजा के लिए दुर्भाग्य की सूचक हैं॥ 21॥
 
Yudhishthira's anger, the fighting between Bhishma and Arjuna, and my efforts to use my various weapons - these three events are certainly indicative of misfortune for the people.॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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