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mahabharat 6.112.17: कुन्तीकुमार अर्जुन, शततान में श्रेष्ठ पापी पांचाल राजकुमार शिखण्डी को युद्ध में ले जाकर भीष्म के साथ युद्ध करने के लिए यहाँ आये हैं ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 6.112: द्रोणाचार्यका अश्वत्थामाको अशुभ शकुनोंकी सूचना देते हुए उसे भीष्मकी रक्षाके लिये धृष्टद्युम्नसे युद्ध करनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 112: द्रोणाचार्यका अश्वत्थामाको अशुभ शकुनोंकी सूचना देते हुए उसे भीष्मकी रक्षाके लिये धृष्टद्युम्नसे युद्ध करनेका आदेश देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.112.17 
तं चेह निकृतिप्रज्ञं पाञ्चाल्यं पापचेतसम्।
पुरस्कृत्य रणे पार्थो भीष्मस्यायोधनं गत:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीकुमार अर्जुन, शततान में श्रेष्ठ पापी पांचाल राजकुमार शिखण्डी को युद्ध में ले जाकर भीष्म के साथ युद्ध करने के लिए यहाँ आये हैं ॥17॥
 
Kunti Kumar Arjun has gone here to fight with Bhishma, having led that sinful Panchal prince Shikhandi, the wisest of Shathata, in the battle. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)