श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 112: द्रोणाचार्यका अश्वत्थामाको अशुभ शकुनोंकी सूचना देते हुए उसे भीष्मकी रक्षाके लिये धृष्टद्युम्नसे युद्ध करनेका आदेश देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.112.11 
देवतायतनस्थाश्च कौरवेन्द्रस्य देवता:।
कम्पन्ते च हसन्ते च नृत्यन्ति च रुदन्ति च॥ ११॥
 
 
अनुवाद
कौरवराज धृतराष्ट्र के मंदिरों में मूर्तियाँ चलती, हँसती, नाचती और रोती हुई प्रतीत होती हैं॥11॥
 
‘The idols in the temples of Kaurava king Dhritarashtra seem to be moving, laughing, dancing and crying.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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