श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 111: कौरव-पाण्डवपक्षके प्रमुख महारथियोंके द्वन्द्व-युद्धका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.111.8 
विहाय राक्षसं युद्धे शैनेयो रथिनां वर:।
प्राग्ज्योतिषाय चिक्षेप शरान् संनतपर्वण:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
तब रथियों में श्रेष्ठ सत्य ने युद्ध में उस राक्षस को छोड़कर प्राग्ज्यौतिषपुर के राजा भगदत्त पर बहुत से धनुषबाण चलाये॥8॥
 
Then Satya, the best among the charioteers, left that demon in the battle and shot many bowed arrows at Pragjyotishpur King Bhagdatta. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)