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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 111: कौरव-पाण्डवपक्षके प्रमुख महारथियोंके द्वन्द्व-युद्धका वर्णन  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  6.111.51 
द्रोणस्य रथनिर्घोषं पर्जन्यनिनदोपमम्।
श्रुत्वा प्रभद्रका राजन् समकम्पन्त मारिष॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
राजन! द्रोणाचार्य के रथ की गड़गड़ाहट मेघों की गर्जना के समान थी। आर्य! उसे सुनकर वीर प्रभद्रक काँप उठा। 51.
 
King! The rumbling sound of Dronacharya's chariot sounded like the roar of the clouds. Arya! On hearing it, the brave Prabhadraka trembled. 51.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)