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mahabharat 6.111.47-48h: वे दोनों महापुरुष क्रोध में भरकर सूर्य के समान तेजस्वी तथा लोहार द्वारा चमकाए हुए बाणों द्वारा एक दूसरे पर आक्रमण कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 6.111: कौरव-पाण्डवपक्षके प्रमुख महारथियोंके द्वन्द्व-युद्धका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 111: कौरव-पाण्डवपक्षके प्रमुख महारथियोंके द्वन्द्व-युद्धका वर्णन  »  श्लोक 47-48h
 
 
श्लोक  6.111.47-48h 
तौ शरान् सूर्यसंकाशान् कर्मारपरिमार्जितान्॥ ४७॥
अन्योन्यस्य रणे क्रुद्धौ चिक्षिपाते नरर्षभौ।
 
 
अनुवाद
वे दोनों महापुरुष क्रोध में भरकर सूर्य के समान तेजस्वी तथा लोहार द्वारा चमकाए हुए बाणों द्वारा एक दूसरे पर आक्रमण कर रहे थे।
 
Both those great men, filled with rage, were attacking each other with arrows, as bright as the Sun, which had been polished by a blacksmith. 47 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)