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mahabharat 6.111.45-46h: तत्पश्चात् युद्धभूमि में सोमदत्तकुमार ने भीमसेन की छाती पर स्वर्ण पंख वाले अत्यन्त तीक्ष्ण बाण से प्रहार किया।   |   mahabharat अध्याय 6.111: कौरव-पाण्डवपक्षके प्रमुख महारथियोंके द्वन्द्व-युद्धका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 111: कौरव-पाण्डवपक्षके प्रमुख महारथियोंके द्वन्द्व-युद्धका वर्णन  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  6.111.45-46h 
सौमदत्तिरथो भीममाजघान स्तनान्तरे॥ ४५॥
नाराचेन सुतीक्ष्णेन रुक्मपुङ्खेन संयुगे।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् युद्धभूमि में सोमदत्तकुमार ने भीमसेन की छाती पर स्वर्ण पंख वाले अत्यन्त तीक्ष्ण बाण से प्रहार किया।
 
Thereafter, on the battlefield, Somadattakumara struck Bhimasena on his chest with a very sharp arrow having golden feathers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)