Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.111.31-32h: तत्पश्चात् कृपाचार्य ने भीष्म के प्राण बचाने की इच्छा से युद्धस्थल में भार वहन करने में समर्थ दूसरा धनुष लिया और बड़े हर्ष तथा क्रोध से सहदेव की छाती में दस तीखे बाण मारे।   |   mahabharat अध्याय 6.111: कौरव-पाण्डवपक्षके प्रमुख महारथियोंके द्वन्द्व-युद्धका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 111: कौरव-पाण्डवपक्षके प्रमुख महारथियोंके द्वन्द्व-युद्धका वर्णन  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  6.111.31-32h 
सोऽन्यत् कार्मुकमादाय समरे भारसाधनम्।
माद्रीपुत्रं सुसंहृष्टो दशभिर्निशितै: शरै:॥ ३१॥
आजघानोरसि क्रुद्ध इच्छन् भीष्मस्य जीवितम्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् कृपाचार्य ने भीष्म के प्राण बचाने की इच्छा से युद्धस्थल में भार वहन करने में समर्थ दूसरा धनुष लिया और बड़े हर्ष तथा क्रोध से सहदेव की छाती में दस तीखे बाण मारे।
 
Thereafter, Krupacharya, wanting to save Bhishma's life, took another bow capable of bearing the load in the battlefield and with great joy and anger shot ten sharp arrows into Sahadeva's chest. 31 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)