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mahabharat 6.111.28: इसी प्रकार शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य ने आगे आकर भीष्म पर आक्रमण करने वाले सहदेव को रोक दिया, मानो वन में किसी मदोन्मत्त हाथीराज ने किसी मदोन्मत्त हाथी पर आक्रमण कर दिया हो।   |   mahabharat अध्याय 6.111: कौरव-पाण्डवपक्षके प्रमुख महारथियोंके द्वन्द्व-युद्धका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 111: कौरव-पाण्डवपक्षके प्रमुख महारथियोंके द्वन्द्व-युद्धका वर्णन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.111.28 
सहदेवं तथा यान्तं कृप: शारद्वतोऽभ्ययात्।
यथा नागो वने नागं मत्तो मत्तमुपाद्रवत्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य ने आगे आकर भीष्म पर आक्रमण करने वाले सहदेव को रोक दिया, मानो वन में किसी मदोन्मत्त हाथीराज ने किसी मदोन्मत्त हाथी पर आक्रमण कर दिया हो।
 
Similarly, Sharadwan's son Kripacharya came forward and stopped Sahadeva, who was attacking Bhishma, as if a mad elephant king had attacked a drunken elephant in the forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)