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mahabharat 6.111.11-12h: इस प्रकार अत्यन्त घायल होकर महाधनुर्धर भगदत्त अपने मुँह के कोनों को चाटने लगे। फिर उस महासमर में उन्होंने सोने और वैदूर्य रत्नों से विभूषित तथा यमदण्ड के समान भयंकर लोहे के एक शक्तिशाली भाले का प्रयोग किया।   |   mahabharat अध्याय 6.111: कौरव-पाण्डवपक्षके प्रमुख महारथियोंके द्वन्द्व-युद्धका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 111: कौरव-पाण्डवपक्षके प्रमुख महारथियोंके द्वन्द्व-युद्धका वर्णन  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  6.111.11-12h 
सोऽतिविद्धो महेष्वास: सृक्किणी परिसंलिहन्।
शक्तिं कनकवैदूर्यभूषितामायसीं दृढाम्॥ ११॥
यमदण्डोपमां घोरां चिक्षेप परमाहवे।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अत्यन्त घायल होकर महाधनुर्धर भगदत्त अपने मुँह के कोनों को चाटने लगे। फिर उस महासमर में उन्होंने सोने और वैदूर्य रत्नों से विभूषित तथा यमदण्ड के समान भयंकर लोहे के एक शक्तिशाली भाले का प्रयोग किया।
 
Being thus severely wounded, the great archer Bhagadatta began licking the corners of his mouth. Then in that great battle he used a strong iron spear adorned with gold and vaidurya gems and as dreadful as the Yama Danda.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)