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mahabharat 6.110.45-46: इस प्रकार आपका पुत्र दु:शासन महामनस्वी पाण्डवपुत्र अर्जुन से पीड़ित होकर युद्ध में अर्जुन को छोड़कर तुरंत ही भीष्म के रथ पर बैठ गया। उस समय गहरे समुद्र में डूबते हुए भीष्मजी दु:शासन के लिए द्वीप बन गये।   |   mahabharat अध्याय 6.110: अर्जुनके प्रोत्साहनसे शिखण्डीका भीष्मपर आक्रमण और दोनों सेनाओंके प्रमुख वीरोंका परस्पर युद्ध तथा दु:शासनका अर्जुनके साथ घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 110: अर्जुनके प्रोत्साहनसे शिखण्डीका भीष्मपर आक्रमण और दोनों सेनाओंके प्रमुख वीरोंका परस्पर युद्ध तथा दु:शासनका अर्जुनके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 45-46
 
 
श्लोक  6.110.45-46 
पीडितश्चैव पुत्रस्ते पाण्डवेन महात्मना॥ ४५॥
हित्वा पार्थं रणे तूर्णं भीष्मस्य रथमाव्रजत्।
अगाधे मज्जतस्तस्य द्वीपो भीष्मोऽभवत् तदा॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार आपका पुत्र दु:शासन महामनस्वी पाण्डवपुत्र अर्जुन से पीड़ित होकर युद्ध में अर्जुन को छोड़कर तुरंत ही भीष्म के रथ पर बैठ गया। उस समय गहरे समुद्र में डूबते हुए भीष्मजी दु:शासन के लिए द्वीप बन गये।
 
In this manner, your son Dushasan, being afflicted by the great-minded Pandava's son Arjuna, immediately left Arjuna in the battle and sat on Bhishma's chariot. At that time, Bhishmaji became an island for Dushasan, who was drowning in the deep sea.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)