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mahabharat 6.110.43-44h: बाणों को काटकर आपके पुत्र ने तीखे बाणों से कुन्तीपुत्र अर्जुन को घायल कर दिया। तत्पश्चात् युद्धस्थल में कुपित होकर अर्जुन ने अपने धनुष पर सुवर्णमय पंख लगे बाणों को चढ़ाया और उन्हें एक शिला पर रगड़कर तीखा करके दु:शासन पर चलाया।   |   mahabharat अध्याय 6.110: अर्जुनके प्रोत्साहनसे शिखण्डीका भीष्मपर आक्रमण और दोनों सेनाओंके प्रमुख वीरोंका परस्पर युद्ध तथा दु:शासनका अर्जुनके साथ घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 110: अर्जुनके प्रोत्साहनसे शिखण्डीका भीष्मपर आक्रमण और दोनों सेनाओंके प्रमुख वीरोंका परस्पर युद्ध तथा दु:शासनका अर्जुनके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 43-44h
 
 
श्लोक  6.110.43-44h 
पार्थं च निशितैर्बाणैरविध्यत् तनयस्तव।
तत: क्रुद्धो रणे पार्थ: शरान् संधाय कार्मुके॥ ४३॥
प्रेषयामास समरे स्वर्णपुङ्खाञ्छिलाशितान्।
 
 
अनुवाद
बाणों को काटकर आपके पुत्र ने तीखे बाणों से कुन्तीपुत्र अर्जुन को घायल कर दिया। तत्पश्चात् युद्धस्थल में कुपित होकर अर्जुन ने अपने धनुष पर सुवर्णमय पंख लगे बाणों को चढ़ाया और उन्हें एक शिला पर रगड़कर तीखा करके दु:शासन पर चलाया।
 
After cutting the arrows, your son pierced Arjuna, the son of Kunti, with sharp arrows. Then in the battle-field Arjuna, infuriated, fixed arrows fitted with golden feathers on his bow and sharpened them by rubbing them on a rock and shot them at Dushasan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)