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mahabharat 6.110.41: महाराज ! तब शत्रुओं को संताप देने वाले पाण्डुपुत्र अर्जुन ने कुपित होकर दु:शासन पर यमदण्ड के समान भयंकर अनेक बाण छोड़े ॥41॥   |   mahabharat अध्याय 6.110: अर्जुनके प्रोत्साहनसे शिखण्डीका भीष्मपर आक्रमण और दोनों सेनाओंके प्रमुख वीरोंका परस्पर युद्ध तथा दु:शासनका अर्जुनके साथ घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 110: अर्जुनके प्रोत्साहनसे शिखण्डीका भीष्मपर आक्रमण और दोनों सेनाओंके प्रमुख वीरोंका परस्पर युद्ध तथा दु:शासनका अर्जुनके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  6.110.41 
तस्य क्रुद्धो महाराज पाण्डव: शत्रुतापन:।
अप्रैषीद् विशिखान् घोरान् यमदण्डोपमान् बहून्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
महाराज ! तब शत्रुओं को संताप देने वाले पाण्डुपुत्र अर्जुन ने कुपित होकर दु:शासन पर यमदण्ड के समान भयंकर अनेक बाण छोड़े ॥41॥
 
Maharaj! Then Arjuna, the son of Pandu, who torments the enemies, became enraged and shot many arrows at Dushasana as fierce as the Yamdanda. 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)