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mahabharat 6.110.34: भरतश्रेष्ठ! तब दु:शासन ने क्रोधित होकर धनुष से अर्जुन के ललाट पर तीन पंखदार बाण मारे॥34॥   |   mahabharat अध्याय 6.110: अर्जुनके प्रोत्साहनसे शिखण्डीका भीष्मपर आक्रमण और दोनों सेनाओंके प्रमुख वीरोंका परस्पर युद्ध तथा दु:शासनका अर्जुनके साथ घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 110: अर्जुनके प्रोत्साहनसे शिखण्डीका भीष्मपर आक्रमण और दोनों सेनाओंके प्रमुख वीरोंका परस्पर युद्ध तथा दु:शासनका अर्जुनके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.110.34 
दु:शासनस्त्रिभि: क्रुद्ध: पार्थं विव्याध पत्रिभि:।
ललाटे भरतश्रेष्ठ शरै: संनतपर्वभि:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! तब दु:शासन ने क्रोधित होकर धनुष से अर्जुन के ललाट पर तीन पंखदार बाण मारे॥34॥
 
Bharatshrestha! Then Dushasana became enraged and shot three feathered arrows with bent bows into Arjuna's forehead. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)