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mahabharat 6.110.33-d3h: वे बाण युद्धभूमि में दु:शासन के कवच को भेदकर उसका रक्त पीने लगे, मानो कोई प्यासा सर्प तालाब में घुस गया हो।   |   mahabharat अध्याय 6.110: अर्जुनके प्रोत्साहनसे शिखण्डीका भीष्मपर आक्रमण और दोनों सेनाओंके प्रमुख वीरोंका परस्पर युद्ध तथा दु:शासनका अर्जुनके साथ घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 110: अर्जुनके प्रोत्साहनसे शिखण्डीका भीष्मपर आक्रमण और दोनों सेनाओंके प्रमुख वीरोंका परस्पर युद्ध तथा दु:शासनका अर्जुनके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 33-d3h
 
 
श्लोक  6.110.33-d3h 
ते तस्य कवचं भित्त्वा पपु: शोणितमाहवे॥ ३३॥
(यथैव पन्नगा राजंस्तटाकं तृषितास्तथा।)
 
 
अनुवाद
वे बाण युद्धभूमि में दु:शासन के कवच को भेदकर उसका रक्त पीने लगे, मानो कोई प्यासा सर्प तालाब में घुस गया हो।
 
Those arrows pierced Dushasan's armour on the battlefield and began drinking his blood, as if a thirsty serpent had entered a pond.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)