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mahabharat 6.110.3: भरतश्रेष्ठ! जब अर्जुन ने शिखंडी से यह बात कही तो पार्थ की वह बात सुनकर वह गंगनन्दन भीष्म पर टूट पड़ा। 3॥   |   mahabharat अध्याय 6.110: अर्जुनके प्रोत्साहनसे शिखण्डीका भीष्मपर आक्रमण और दोनों सेनाओंके प्रमुख वीरोंका परस्पर युद्ध तथा दु:शासनका अर्जुनके साथ घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 110: अर्जुनके प्रोत्साहनसे शिखण्डीका भीष्मपर आक्रमण और दोनों सेनाओंके प्रमुख वीरोंका परस्पर युद्ध तथा दु:शासनका अर्जुनके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.110.3 
एवमुक्तस्तु पार्थेन शिखण्डी भरतर्षभ।
अभ्यद्रवत गाङ्गेयं श्रुत्वा पार्थस्य भाषितम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! जब अर्जुन ने शिखंडी से यह बात कही तो पार्थ की वह बात सुनकर वह गंगनन्दन भीष्म पर टूट पड़ा। 3॥
 
Bharatshrestha! When Arjun said this to Shikhandi, then hearing that statement of Partha, he attacked Ganganandan Bhishma. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)